कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन (Kaal Sarp Dosh Puja in Ujjain)
कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन मैं ज्योतिषाचार्य श्री योगेश जोशी जी के द्वारा
अगर किसी ज्योतिष ने या जानकार ने आपकी कुंडली में कालसर्प दोष होने की बात कही है, तो घबराएं नहीं। उससे बचने का उपाय है और वो भी बहुत आसान। कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन (Kaal Sarp Dosh Puja in Ujjain) में विधि-विधान से कराने पर इसके अशुभ प्रभावों से मुक्ति पाई जा सकती है।
- कालसर्पयोग का विधान भारत मे दो जगह पर होता है नासिक ओर उज्जैन |
- उज्जैन में इसका महत्व इसलिए हे कि बाबा महाकाल के चरणों मे ओर शिप्रा मोक्षदायिनी के तट पर निवारण होता है।
- कालसर्प दोष पूजा के माध्यम से व्यक्ति को अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलती है और उन्हें सुख, समृद्धि, और सफलता की प्राप्ति में मदद मिल सकती है।
- यह पूजा धार्मिक दृष्टि से व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में भी मदद करती है और उनके जीवन में सुख और शांति लाती है।
कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन (Kaal Sarp Dosh Puja in Ujjain) क्या है?
जब भी इस पृथ्वी पर कोई आत्मा मनुष्य शरीर में आती है अर्थात उसका जन्म होता है, तो उसका भाग्य निर्धारण उसकी कुंडली के रूप में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। यह कुंडली उस बालक का भविष्य बताती है। जन्म कुंडली में ग्रहों की एक-दूसरे से स्थिति और संबंध के कारण अनेक प्रकार के योग बनते हैं, जिनमें कुछ शुभ होते हैं और कुछ दोष भी बनते हैं। जब राहु और केतु के मध्य सारे ग्रह आ जाते हैं, तब इस योग को कालसर्प दोष कहा जाता है।
इसका नाम कालसर्प इसलिए रखा गया है क्योंकि राहु को काल का अधिपति देवता माना गया है और केतु को सर्पों का अधिपति। इस दोष के प्रभाव से व्यक्ति को जीवन में संघर्ष, बाधाएं, विवाह में देरी, आर्थिक समस्याएं और मानसिक अशांति का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन (Kaal Sarp Dosh Puja in Ujjain) विधि-विधान से कराने पर इस दोष के अशुभ प्रभावों में कमी आती है।
शास्त्रों के अनुसार उज्जैन में बाबा महाकाल और शिप्रा नदी के तट पर की गई कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन (Kaal Sarp Dosh Puja in Ujjain) व्यक्ति के जीवन में संतुलन, शांति और सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक मानी जाती है।
कालसर्प दोष केसे होता है-
ब्रामाण्ड मे यदि नाग दोष का अधय्यन किया जाए तो राहु-केतु छाया गुरु है।जो हमेशा एक दूसरे को सामने 180० डिग्री पर रहते है ,ये ब्रामाण्ड के क्षितिज की छाया है। यदि राहु-केतु को मध्य बाए या दाए सभी गृह आ जाए तो कालसर्प दोष बनता है।इसकी गति वर्षि गति कहलती है ,पुर्व जन्म मे नारादोष के कारण यह दोष बनता है।यह दोष लग्न कुंडली मे भी बनता है ।अन्य मे वही नाग को लात मारी हो या नाग को मारा हो तो यह दोष बनता है।
यह दोष लग्न कुंडली में भी बन सकता है। शास्त्रों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति ने पूर्व जन्म में नाग को मारा हो, नाग को कष्ट पहुंचाया हो या नाग का अपमान किया हो, तो इस प्रकार का दोष कुंडली में दिखाई देता है। ऐसे में कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन (Kaal Sarp Dosh Puja in Ujjain) विधि-विधान से कराने पर इस दोष के अशुभ प्रभावों को शांत किया जा सकता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव संभव होता है।
कालसर्प दोष के लक्षण क्या है-
1. कार्य क्षेत्र मे अवरोध बार-बार रुकावट आना।
2. पड़ाई मे अवरोध आना।
3. सर्प का भय बना रहना।
4. भोजन मे बाल आना।
5. बुरे-बुरे स्वप्न आना।
6. बिस्तर मे पेशाब करना।
7. अपने आप की स्वप्न मे उड़ते मुह देखना।
8. अपने घर मे सापों का बसेरा रहना सर्प का काटना भी हो सकता है।
कालसर्प दोष का निवारण क्या है-
कालसर्प दोष का कई प्रकार से वर्णन मिलता है, लेकिन ग्रंथों के अनुसार समुद्र मंथन के समय जब अमृत का विभाजन देवताओं और दानवों में हुआ, तब राहु नामक राक्षस देवता का रूप धारण कर अमृतपान करने लगा। सूर्य भगवान ने उसे पहचान लिया और भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से उसके दो भाग कर दिए। ऊपर का भाग राहु और नीचे का भाग केतु कहलाया।
धड़ अलग होने पर उनके कुछ अंश उज्जैन की धार्मिक नगरी और नासिक के गोदावरी तट पर गिरे, इसलिए इस दोष का निवारण मुख्य रूप से इन्हीं स्थानों पर किया जाता है। उज्जैन में भगवान भोलेनाथ महाकाल के रूप में विराजमान हैं, अतः यहां की गई कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन (Kaal Sarp Dosh Puja in Ujjain) को विशेष फलदायी माना जाता है।
कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन (Kaal Sarp Dosh Puja in Ujjain) के बारे में जानें-
श्री ज्योतिषाचार्य श्री योगेश जोशी जी कालसर्प दोष के निवारण के लिए उज्जैन में क्षिप्रा नदी तट पर पूजा करते हैं। बहुत से भक्त देश-विदेश से यहां पूजा कराने आते हैं और शुभ परिणाम प्राप्त करते हैं। पूजन सामग्री हमारे द्वारा ही उपलब्ध कराई जाती है।
कालसर्प दोष पूजा में बेदी बनती है, जिसमें गणेश गौरी पूजन, पुण्यवाचन, षोडश मातृका, सप्तघृत मातृका, पितृ ध्यान, नागमंडल, मनसा देवी, नवग्रह व रुद्रकलश पूजन, हवन, आरती के बाद नाग विसर्जन नदी में किया जाता है। भक्त को एक गमछा लाना होता है जिसे पूजन के बाद नदी में प्रवाहित किया जाता है। इस प्रकार कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन (Kaal Sarp Dosh Puja in Ujjain) श्रद्धा व नियम से संपन्न कराई जाती है।
कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन किसको करवानी चाहिए-
जिन व्यक्ति को कठिन परिश्रम के बाद भी सफलता ना मिली हो, उसको Kaal Sarp Dosh Puja in Ujjain (कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन) करवानी चाहिए। असफलता जिनको दरवाजे पर बड़ी रुकावट बन चुकी हो, उन्हें नि:संदेह अपनी कुंडली किसी आचार्य ज्योतिष ब्राह्मण को अवश्य दिखानी चाहिए। कुंडली में बारह प्रकार के कालसर्प पाए जाते हैं, जिनका निवारण कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन में किया जाता है।
1. अनंत कालसर्प योग – जब राहु और केतु कुंडली में पहली और सातवीं स्थिति में रहते हैं, तो यह अनंत कालसर्प योग कहा जाता है। ग्रहों के प्रभाव से अपमान, चिंता और पानी का भय हो सकता है। ऐसे जातकों को Kaal Sarp Dosh Puja in Ujjain करानी चाहिए।
2. कुलिक कालसर्प योग – दूसरे और आठवें स्थान पर राहु-केतु होने पर यह योग बनता है। इससे मौद्रिक हानि, दुर्घटना, भाषण विकार और पारिवारिक संघर्ष हो सकता है, जिसका समाधान कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन से संभव है।
3. वासुकि कालसर्प योग – तीसरे और नौवें स्थान पर राहु-केतु होने पर रक्तचाप, अचानक हानि और रिश्तेदारों के कारण नुकसान होता है।
4. शंकपाल कालसर्प योग – चौथी और दसवीं स्थिति में राहु-केतु होने पर नौकरी, पिता के स्नेह और जीवन में दुःख का सामना करना पड़ता है।
5. पदम् कालसर्प योग – पांचवीं और ग्यारहवीं स्थिति में शिक्षा, पत्नी की बीमारी, संतान में देरी और मित्रों से हानि होती है।
6. महापदम कालसर्प योग – छठी और बारहवीं स्थिति में पीठ दर्द, सिरदर्द, त्वचा रोग और आर्थिक परेशानी होती है।
7. तक्षक कालसर्प योग – सातवीं और पहली स्थिति में व्यापार हानि, वैवाहिक जीवन में कष्ट और चिंता बनी रहती है।
8. कार्कोटक कालसर्प योग – आठवीं और दूसरी स्थिति में पैतृक संपत्ति, हृदय रोग और पारिवारिक संकट होते हैं।
9. शंखनाद कालसर्प योग – नौवें और तीसरे स्थान पर कठोर व्यवहार, उच्च रक्तचाप और निरंतर चिंता होती है।
10. घातक कालसर्प योग – चौथे घर में राहु और दसवें में केतु होने पर कानूनी विवाद संभव है, पर सकारात्मक स्थिति में उच्च पद भी देता है।
11. विशधर कालसर्प योग – ग्यारहवीं और पांचवीं स्थिति में व्यक्ति अस्थिर हो जाता है।
12. शेषनाग कालसर्प योग – बारहवीं और छठी स्थिति में हार, दुर्भाग्य, आंखों की बीमारी और गुप्त शत्रु परेशान करते हैं।
यह बारह प्रकार के कालसर्प राहु-केतु की अलग-अलग स्थिति पर आधारित हैं। अब आपकी कुंडली में कौन-सा कालसर्प है, यह जानने और Kaal Sarp Dosh Puja in Ujjain (कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन) कराने के लिए ज्योतिषाचार्य श्री योगेश जोशी जी से संपर्क करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1. कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन में क्यों कराई जाती है?
कुंडली में राहु-केतु के कारण बनने वाले कालसर्प दोष से जीवन में बाधाएँ और असफलता आती है। कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन से इसके नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।
प्रश्न 2. कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन में कहाँ कराई जाती है?
कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन पवित्र नगरी उज्जैन में अनुभवी आचार्यों द्वारा कराई जाती है।
प्रश्न 3. कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन में कितने समय में पूरी होती है?
सामान्यतः कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन एक ही दिन में पूरी हो जाती है।
प्रश्न 4. क्या सभी प्रकार के कालसर्प दोष के लिए एक ही पूजा होती है?
हाँ, Kaal Sarp Dosh Puja in Ujjain सभी 12 प्रकार के कालसर्प दोष के लिए प्रभावी मानी जाती है।
प्रश्न 5. Kaal Sarp Dosh Puja in Ujjain कब कराना शुभ होता है?
अमावस्या, नाग पंचमी या शुभ मुहूर्त में कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन कराना श्रेष्ठ माना जाता है।
प्रश्न 6. Kaal Sarp Dosh Puja in Ujjain से क्या लाभ मिलते हैं?
इस पूजा से नौकरी, व्यापार, विवाह, संतान और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है।
प्रश्न 7. क्या बिना कुंडली देखे कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन में कराई जा सकती है?
बेहतर परिणाम के लिए कुंडली देखकर पूजा कराना उचित माना जाता है।
प्रश्न 8. Kaal Sarp Dosh Puja in Ujjain कौन करवाता है?
यह पूजा अनुभवी वैदिक ज्योतिषाचार्य एवं ब्राह्मणों द्वारा कराई जाती है।
