विवाह बाधा निवारण पूजा उज्जैन
अर्क विवाह • कुंभ विवाह • मंगल भात पूजा

विवाह में देरी एवं मांगलिक दोष का वैदिक निवारण

यदि योग्य आयु होने के उपरांत भी विवाह के रिश्ते तय नहीं हो पा रहे हैं, बातचीत बनते-बनते टूट जाती है, या कुंडली में भारी मांगलिक दोष, अंगारक योग अथवा कालसर्प दोष की उपस्थिति है, तो उज्जैन में विधि-विधान से की जाने वाली विवाह बाधा निवारण पूजा अत्यंत फलदायी होती है।

उज्जैन की मोक्षदायिनी शिप्रा के तट पर स्थित श्री मंगलनाथ धाम में ज्योतिषाचार्य श्री योगेश जोशी जी द्वारा जातक की कुंडली के गहन मिलान के उपरांत शास्त्रोक्त अर्क विवाह, कुंभ विवाह अथवा मंगल भात पूजा संपन्न कराई जाती है, जिससे सभी अनिष्ट ग्रह शांत होते हैं और शीघ्र विवाह का योग बनता है।

विवाह दोष निवारण हेतु प्रमुख वैदिक अनुष्ठान

कुंडली के दोष एवं स्थिति के अनुसार निम्नलिखित शास्त्रीय अनुष्ठान किए जाते हैं:

1. कुंभ विवाह (कन्या हेतु)

यदि कन्या की कुंडली में सप्तम या अष्टम भाव में मंगल हो, अथवा मांगलिक दोष के कारण वैवाहिक सुख में बाधा का भय हो, तो वास्तविक विवाह से पूर्व भगवान विष्णु स्वरूप मिट्टी के कलश या शालिग्राम जी से विधिपूर्वक कुंभ विवाह कराया जाता है।

2. अर्क विवाह (वर हेतु)

यदि वर की कुंडली में द्वि-विवाह योग, मांगलिक दोष या सूर्य-मंगल की अशुभ युति हो, तो सूर्य के प्रतीक मंदार (आक) के पौधे के साथ वैदिक मंत्रोच्चार द्वारा अर्क विवाह संपन्न कराया जाता है, जिससे दोष पूर्णतः शांत हो जाता है।

3. श्री मंगलनाथ मंगल भात पूजा

उज्जैन के अंगारेश्वर एवं मंगलनाथ मंदिर में शिवलिंग पर पके हुए चावल (भात) से अभिषेक एवं लेप किया जाता है। इससे मंगल ग्रह की क्रूरता शांत होकर सौम्यता में बदल जाती है और विवाह में आ रही रुकावटें समाप्त होती हैं।

4. माता कात्यायनी मंत्र एवं शिव विवाह पाठ

मां कात्यायनी शीघ्र मनोवांछित वर प्रदान करने वाली देवी हैं। उनके सिद्ध मंत्र का विधिवत जप और रामचरितमानस के 'शिव-पार्वती विवाह प्रसंग' का नियमित श्रवण या पाठ विवाह बाधा को दूर करता है।

परामर्श: अपनी या अपने बच्चों की कुंडली पंडित जी को दिखाकर यह सुनिश्चित करें कि विवाह में देरी का वास्तविक कारण मंगल दोष, शनि की ढैय्या, या कालसर्प योग है, ताकि सटीक अनुष्ठान कराया जा सके।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

जन्म कुंडली में सप्तम भाव पर पाप ग्रहों (शनि, राहु, केतु) का प्रभाव, तीव्र मंगल दोष, या गुरु और शुक्र का अस्त/कमजोर होना विवाह में अप्रत्याशित देरी का कारण बनता है।
कन्या की कुंडली में यदि मांगलिक दोष या वैधव्य योग हो तो कुंभ (मिट्टी के घड़े) या विष्णु प्रतिमा से कुंभ विवाह कराया जाता है। वर की कुंडली में दोष होने पर मंदार (अर्क) के वृक्ष से अर्क विवाह कराया जाता है।
उज्जैन स्थित श्री मंगलनाथ मंदिर को मंगल ग्रह का प्राकट्य स्थल माना जाता है। यहाँ संपन्न की गई मंगल भात पूजा एवं अर्क/कुंभ विवाह से मंगल के सभी दोष शीघ्र शांत होते हैं।