मांगलिक दोष निवारण पूजा

Bagla Mukhi Puja

मांगलिक दोष निवारण पूजा (Mangal Dosh Puja in Ujjain) ज्योतिषाचार्य श्री योगेश जोशी जी के द्वारा

अगर किसी ज्योतिषी ने या जानकार ने आपकी कुंडली में मंगल दोष होने की बात कही है तो घबराएं नहीं। उससे बचने का उपाय है और वह भी बहुत आसान। शास्त्रों के अनुसार विधि-विधान से की गई मांगलिक दोष निवारण पूजा (Mangal Dosh Puja in Ujjain) के माध्यम से मंगल दोष के अशुभ प्रभावों को शांत किया जा सकता है और विवाह एवं जीवन में आ रही बाधाओं से राहत पाई जा सकती है।

  • मंगल दोष का उचित निवारण के लिए उज्जैन आए।
  • उज्जैन में इसका महत्व इसलिए हे कि बाबा महाकाल के चरणों मे ओर शिप्रा मोक्षदायिनी के अंगारेश्वर मंदिर पर निवारण होता है।
  • लाल किताब के 'मूल ग्रन्थ' के अनुसार मंगल चौथे और आठवें भाव में अशुभ होता है, शेष 1, 2, 3, 5, 6, 7, 9, 10, 11, 12 वें भाव में शुभ फल प्रदान करता है। यदि मंगल किसी भवन में अकेला बैठा है तो जातक चिड़ियाघर के कैदी की भाँति होता है।

मांगलिक दोष क्या है ?

प्रायः विवाह के अवसर पर वर-वधू की कुण्डली का मिलान करते समय यह प्रश्न सबसे पहले आता है कि मंगलीक दोष क्या है और इसका विशेष रूप से विचार क्यों किया जाता है। मंगलीक दोष होने या न होने से जातक के वैवाहिक जीवन, सुख-शांति और पारिवारिक संतुलन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसी कारण ज्योतिष शास्त्र में मांगलिक दोष निवारण पूजा (Mangal Dosh Puja in Ujjain) को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

मंगल एक पाप ग्रह है। जब मंगल लग्न भाव, चतुर्थ भाव, सप्तम भाव, अष्टम भाव अथवा द्वादश भाव में स्थित होता है, तो उस भाव पर पड़ने वाले कुप्रभाव को ही मंगल दोष कहा जाता है और ऐसा जातक मंगलीक कहलाता है। कुण्डली के 1, 4, 7, 8 और 12वें भाव में मंगल की स्थिति के आधार पर यह विचार किया जाता है कि मंगल कितना मंगलीक है और मांगलिक दोष निवारण पूजा (Mangal Dosh Puja in Ujjain) की आवश्यकता कितनी है।

प्रथम भाव से शरीर, चतुर्थ भाव से सुख, सप्तम भाव से पति-पत्नी का संबंध, अष्टम भाव से आयु और जीवन की बाधाएँ तथा द्वादश भाव से व्यय और हानि का विचार किया जाता है। यदि चतुर्थ भाव में मंगल की दृष्टि पड़े तो भौतिक सुखों में कमी आती है, सप्तम भाव में दृष्टि होने से वैवाहिक जीवन प्रभावित होता है, अष्टम भाव में विघ्न-बाधाएँ बढ़ती हैं और द्वादश भाव में मंगल की दृष्टि से अनावश्यक खर्च और मानसिक चिंता बनी रहती है। इन सभी स्थितियों में शास्त्रों में मांगलिक दोष निवारण पूजा (Mangal Dosh Puja in Ujjain) को प्रभावी उपाय माना गया है।

इसी कारण उज्जैन जैसी पवित्र नगरी में विधि-विधान से की गई मांगलिक दोष निवारण पूजा (Mangal Dosh Puja in Ujjain) से मंगल दोष के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं और जातक के जीवन में विवाह, सुख और स्थिरता के योग मजबूत होते हैं।


मंगल/मांगलिक दोष समाप्त होने का समय-

प्राय: 28 वर्ष पश्चात् जातक पर 'मंगलीक दोष' समाप्त हो जाता है। इसके अलावा निम्न स्थितियों में 'मंगलीक दोष' समाप्त हो जाता है।

1.मेष राशि का मंगल लग्न में, वृश्चिक राशि का चतुर्थ भाव में, मकर राशि का सप्तम भाव में, कर्क राशि का अष्टम भाव में, धनु राशि का द्वादश भाव में हो तो मंगलीक दोष नगण्य हो जाता है।

2. वर-वधू (विवाह के लिए) की कुण्डली मिलाते समय 1, 4, 7, 8 अथवा 12वें भाव में शनि स्थित हो तो 'मंगलीक दोष' समाप्त हो जाता है।

3.कुण्डली के द्वितीय भाव में चन्द्र + शुक्र की युति हो, केन्द्र में चन्द्र + मंगल की युति हो अथवा गुरु मंगल को पूर्ण दृष्टि से देखता हो।

4.मेष या वृश्चिक का मंगल चतुर्थ भाव में, कर्क या मकर का मंगल सप्तम भाव में, मीन का मंगल अष्टम भाव में तथा मेष या कर्क का मंगल व्यय भाव में स्थित हो।

5.बली गुरु शुक्र की राशि या अष्टम भाव में हो तथा सप्तमेशं बलवान होकर केन्द्र अथवा त्रिकोण में हो।

6. वर-कन्या में से किसी एक की कुण्डली में मंगलीक योग हो तथा दूसरे की कुण्डली में मंगल योग कारक भाव में कोई पाप ग्रह स्थित हो तो 'मंगलीक दोष' शून्य हो जाता है।


लाल किताब के मतानुसार मंगल के शुभ-अशुभ के भाव-

लाल किताब के 'मूल ग्रन्थ' के अनुसार मंगल चौथे और आठवें भाव में अशुभ होता है, शेष 1, 2, 3, 5, 6, 7, 9, 10, 11, 12 वें भाव में शुभ फल प्रदान करता है। यदि मंगल किसी भवन में अकेला बैठा है तो जातक चिड़ियाघर के कैदी की भाँति होता है।


मंगल/मांगलिक दोष निवारण के उपाय-

मेष लग्न में मंगलीक मेष लग्न का जातक मंगलीक हो तो निम्नलिखित उपाय करके सुखद जीवन व्यतीत कर सकता है।

1. लाल रुमाल अपने पास रखें।

2. तंदूर में मीठी रोटी पकाकर कुत्ते को खिलाये।

3. चाँदी के कड़े में लोहे की कील लगवाकर धारण करे।

4. दक्षिण दिशा के द्वार वाले मकान में न रहे।

5. ताँबे अथवा सोने की अंगूठी में साढ़े पाँच रत्ती मूंगा जड़वा कर धारण करे। नकली मूंगा हानिकर सिद्ध होगा।

6. किसी कंवारी कन्या को मीठा खिलाये। बहन को भी मीठा खिलायें।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1. मांगलिक दोष निवारण पूजा क्या होती है?

उत्तर: जब कुंडली में मंगल ग्रह की अशुभ स्थिति के कारण मांगलिक दोष बनता है, तब उसके निवारण के लिए जो वैदिक पूजा कराई जाती है, उसे मांगलिक दोष निवारण पूजा कहा जाता है।

प्रश्न 2. Mangal Dosh Puja in Ujjain क्यों कराई जाती है?

उत्तर: Mangal Dosh Puja in Ujjain विवाह में देरी, वैवाहिक कलह, तलाक योग और वैवाहिक जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए कराई जाती है।

प्रश्न 3. मांगलिक दोष निवारण पूजा उज्जैन में ही क्यों कराई जाती है?

उत्तर: उज्जैन एक प्राचीन धार्मिक नगरी है। यहाँ विधि-विधान से की गई मांगलिक दोष निवारण पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है।

प्रश्न 4. Mangal Dosh Puja in Ujjain कितने समय में पूरी होती है?

उत्तर: सामान्यतः Mangal Dosh Puja in Ujjain एक दिन में पूर्ण वैदिक विधि के साथ संपन्न हो जाती है।

प्रश्न 5. क्या विवाह से पहले मांगलिक दोष निवारण पूजा करानी आवश्यक है?

उत्तर: हाँ, यदि कुंडली में मांगलिक दोष हो तो विवाह से पहले मांगलिक दोष निवारण पूजा कराना शुभ और लाभकारी माना जाता है।

प्रश्न 6. Mangal Dosh Puja in Ujjain कब करानी चाहिए?

उत्तर: मंगलवार, अमावस्या, विशेष शुभ मुहूर्त या ज्योतिषाचार्य द्वारा बताए गए समय पर Mangal Dosh Puja in Ujjain कराना उत्तम होता है।

प्रश्न 7. मांगलिक दोष निवारण पूजा से क्या लाभ मिलते हैं?

उत्तर: इस पूजा से विवाह में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं, वैवाहिक जीवन सुखमय बनता है और मानसिक तनाव में कमी आती है।

प्रश्न 8. क्या लड़के और लड़की दोनों को Mangal Dosh Puja in Ujjain करानी चाहिए?

उत्तर: यदि कुंडली में मांगलिक दोष हो, तो लड़का या लड़की कोई भी Mangal Dosh Puja in Ujjain करा सकता है।

प्रश्न 9. क्या बिना कुंडली देखे मांगलिक दोष निवारण पूजा कराई जा सकती है?

उत्तर: सही और प्रभावी परिणाम के लिए कुंडली देखकर मांगलिक दोष निवारण पूजा कराना अधिक उचित माना जाता है।

प्रश्न 10. Mangal Dosh Puja in Ujjain कौन करवाता है?

उत्तर: Mangal Dosh Puja in Ujjain अनुभवी वैदिक ज्योतिषाचार्य एवं ब्राह्मण आचार्यों द्वारा विधि-विधान से कराई जाती है।